बधाई हो!

पिछले साल जब नीना गुप्ता ने ट्वीट लिखकर कहा था कि उन्हें काम चाहिए, तो थोड़ा यकीन सा नहीं हुआ था कि उनके जैसी कलाकार को काम की कमी है। और अब जब उन्हें ‘मुल्क़’ और ‘बधाई हो’ में देखा, तो थोड़ा और भी मुश्किल होता है ये समझना कि हम इतने अच्छे कलाकारों को एकदम भूल कैसे जाते हैं। लेकिन छोड़िये उसे, हमारी याददाश्त ऐसी ही है। फ़िलहाल बात करते हैं फ़िल्म की, जिसने हँसा-हँसाकर जबड़े में दर्द भी कर दिया, सचमुच, और आँसू तो हमारे हर तीसरी फ़िल्म में निकलते ही हैं, तो इंटर्न के डि-नीरो के कहे अनुसार रुमाल तो हम लेकर चलते हैं, लेकिन अक्सर अपने ही लिए।

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